विकास

स्वतंत्रता के बाद, सन् 1949 में मंत्रिमंडल की एक आर्थिक समिति गठित की गई जिसका सचिवालय वित्त मंत्रालय में था । सन् 1950 में इसे मंत्रिमंडल सचिवालय में स्थानांतरित कर दिया गया और इसका नाम बदलकर आर्थिक स्कंध रखा गया और अंततः सन् 1955 में इस सचिवालय में इसका विलय कर दिया गया । सन् 1954 में मंत्रिमंडल सचिवालय के अंतर्गत संगठन एवं पद्धति प्रभाग की स्थापना की गई जिसे बाद में 1964 में गृह मंत्रालय को हस्तांतरित कर दिया गया ।

सन् 1957 में, मंत्रिमंडल सचिवालय के अंतर्गत मंत्रिमंडल की एक सुरक्षा समिति गठित की गई जिसके लिए रक्षा सेवाओं से अधिकारी लिए गए। सन् 1991 के दौरान यह स्कंध रक्षा मंत्रालय को हस्तांतरित कर दिया गया । मंत्रिमंडल सचिवालय के अंतर्गत सन् 1961 में, सांख्यिकी विभाग बनाया गया जिसे फरवरी, 1973 में योजना आयोग के अधीन कर दिया गया । सन् 1962 में मंत्रिमंडल सचिवालय के अंतर्गत विशेष आर्थिक समन्वय विभाग स्थापित किया गया जिसे बाद में आर्थिक सुरक्षा समन्वय मंत्रालय को हस्तांतरित कर दिया गया । अब यह विभाग अस्तित्व में नहीं है । सन् 1965 में संयुक्त आसूचना समिति को सचिवालयी सहायता प्रदान करने के लिए आसूचना स्कंध की स्थापना की गई ।

जनवरी, 1966 से जून, 1966 की अल्पावधि के लिए लोक उद्यम ब्यूरो को मंत्रिमंडल सचिवालय के अधीन लाया गया जिसे बाद में वित्त मंत्रालय के अधीन आर्थिक कार्य विभाग को और उसके बाद सन् 1985 के दौरान उद्योग मंत्रालय के अधीन लोक उद्यम विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया

जून, 1970 में तीन विभाग, नामत: 1. इलैक्ट्रानिकी विभाग; 2. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग; और 3. कार्मिक विभाग मंत्रिमंडल सचिवालय के अधीन बनाए गए और जुलाई, 1970 में मंत्रिमंडल सचिवालय के अधीन मंत्रिमंडल कार्य विभाग के अधीन राजस्व आसूचना महानिदेशालय-सह-प्रवर्तन निदेशालय गठित किया गया । बाद में अगस्त, 1970 में यह निदेशालय कार्मिक विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया ।

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, मई, 1971 में एक स्वतंत्र विभाग बन गया ।

इलैक्ट्रानिकी विभाग सन् 1971 में स्वतंत्र विभाग बना और कार्मिक विभाग भी स्वतंत्र विभाग बन गया । कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग मंत्रिमंडल सचिवालय से गृह मंत्रालय को हस्तांतरित कर दिया गया। इस समय, यह कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय का एक अंग है जिसके दो भाग हो गये हैं अर्थात् कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग तथा प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ।

मंत्रिमंडल सचिवालय के अधीन जुलाई, 1981 में महासागर विकास विभाग बनाया गया और फरवरी, 1982 में यह स्वतंत्र विभाग बन गया ।

लोक शिकायत निदेशालय (डीपीजी)

लोक शिकायत निदेशालय को मंत्रिमंडल सचिवालय में मार्च, 1988 में गठित किया गया था । यह निदेशालय जनता से प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई करता है । नागरिक एमटीएनएल/बीएसएनएल, रेलवे, डाक, बीमा कंपनियां, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इत्यादि जैसे गहन लोक संपर्क रखने वाले विभागों/संगठनों के संबंध में अपनी शिकायतें लोक शिकायत निदेशालय के साथ कागज पर अथवा ऑनलाइन दायर कर सकते हैं ।

शिकायतों की प्रकृति तथा गंभीरता को देखते हुए, यह निदेशालय या तो उन पर टिप्पणियां प्राप्त करता है अथवा उसे उपयुक्त कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग(गों) को हस्तांतरित करता है ।

राष्‍ट्रीय प्राधिकरण, रासायनिक हथियार समझौता (एनए,सीडब्‍ल्‍यूसी)

राष्‍ट्रीय प्राधिकरण, रासायनिक हथियार समझौता (सीडब्‍ल्‍यूसी) की स्‍थापना मंत्रिमंडल के दिनांक 5 मई, 1997 के एक संकल्‍प द्वारा की गई । इसका गठन 14 जनवरी, 1933 को संपन्‍न हुए सम्‍मेलन में प्रारंभत: 130 देशों द्वारा हस्‍ताक्षरित रासायनिक हथियार समझौते में प्रतिपादित दायित्‍वों को पूरा करने के लिए किया गया । इस समझौते का उद्देश्‍य भेद-भाव रहित प्रक्रिया अपनाते हुए सदस्‍य-राज्‍यों द्वारा सभी रासायनिक हथियारों के विकास, उत्‍पादन, प्रदर्शन, हस्‍तांतरण, प्रयोग तथा भंडारण का निषेध करना था । अपने दायित्‍व को पूरा करने के लिए प्रत्‍येक राज्‍य पक्ष को एक राष्‍ट्रीय प्राधिकरण नामनिर्दिष्‍ट करना है अथवा उसकी स्‍थापना करनी है जो रासायनिक हथियार निषेध संगठन तथा अन्‍य राज्‍य पक्षों के साथ प्रभावी तालमेल बनाने के लिए राष्‍ट्रीय केंद्र बिंदु के रूप में कार्य करे । अत: मंत्रिमंडल सचिवालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन राष्‍ट्रीय प्राधिकरण, रासायनिक हथियार समझौता की स्‍थापना की गई ।

राष्‍ट्रीय प्राधिकरण का प्रमुख अध्‍यक्ष होता है जो भारत सरकार के अपर सचिव स्‍तर का होता है । उसकी सहायता के लिए उपयुक्‍त तकनीकी सचिवालय होता है जो विभिन्‍न कार्यों को देखता है । मंत्रिमंडल सचिव की अध्‍यक्षता में एक उच्‍च स्‍तरीय संचालन समिति, जिसमें रसायन तथा पैट्रो रसायन सचिव, विदेश सचिव, रक्षा अनुसंधान और विकास सचिव, रक्षा सचिव तथा अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय प्राधिकरण अन्‍य सदस्‍यों के रूप में शामिल हैं, राष्‍ट्रीय प्राधिकरण के कार्यों का निरीक्षण करती है । राष्‍ट्रीय प्राधिकरण, रासायनिक हथियार समझौता, रासायनिक हथियार समझौता अधिनियम के क्रियान्‍वयन, रासायनिक हथियार समझौता तथा अन्‍य राज्‍य पक्षों के साथ तालमेल, डाटा संग्रहण, घोषणा के दायित्‍वों को पूरा करने, संस्‍थापना करारों संबंधी बातचीत करने, रासायनिक हथियार निषेध संगठन के निरीक्षणों में समन्‍वय, राष्‍ट्रीय निरीक्षकों तथा औद्योगिक कार्मिकों को प्रशिक्षण हेतु उपयुक्‍त सुविधाएं प्रदान करने, गोपनीय कार्य संबंधी सूचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने, एकरूपता, यथार्थता और पूर्णता के लिए घोषणाओं की जांच पड़ताल करने तथा रासायनिक हथियार समझौते से संबंधित गतिविधियों में संलग्‍न एककों के पंजीकरण आदि के लिए उत्‍तरदायी है

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) मिशन

डीबीटी एक बृहद् सुधार पहल है जिसमें आधार का उपयोग करते हुए लाभों को पहचान किए गए लाभार्थियों को नकद अथवा वस्तु-रूप में प्रदान किया जाता है । इसका उद्देश्य प्रदायगी प्रक्रियाओं में कारगरता तथा समावेशिता लाना है जिससे इस प्रणाली में और अधिक जिम्मेदारी तथा पारदर्शिता आती है ।

डीबीटी मिशन को योजना आयोग में डीबीटी के कार्यान्वयन हेतु एक नोडल बिंदु के रूप में कार्य करने के लिए सृजित किया गया था । यह मिशन जुलाई, 13 में व्यय विभाग को हस्तांतरित किया गया था तथा 14.09.2015 को मंत्रिमंडल सचिवालय को हस्तांतरित किया गया ।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय (पीएसए का कार्यालय)

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय (पीएसए का कार्यालय) नवंबर, 1999 में, मुख्यतः

  • बहु अनुप्रयोगों के लिए नवाचारों और सहायता पद्धतियों के सृजन हेतु नीतियां, रणनीतियां और मिशन बनाने,
  • भारत सरकार के विभागों, संस्थाओं एवं उद्योग की सहभागिता से महत्वपूर्ण अवसंरचना, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य सृजित करने के लिए स्थापित किया गया,

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय प्रधान मंत्री की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार संबंधी सलाहकार परिषद् (पीएम-एसटीआईएसी) को भी सेवा प्रदान करता है ।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय को अगस्त, 2018 में प्रशासनिक रूप से मंत्रिमंडल सचिवालय के नियंत्रण में कर दिया गया है ।